सीएए यानि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर दिल्ली के शाहीन बाग मेँ ५० दिनों के ज्यादा समय से विरोध प्रदर्शन हो रहा है. दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने शाहीन भाग मुद्दे को जोर शोर से उठाया। वही आदमी पार्टी इसका जिक्र करने से बचते नज़र आए। इसका असर चुनाव के नतीजे में देखने को मिला. एक सर्वे के माध्यम से यह बात सामने आयी है की शाहीन बाग़ प्रदर्शन के बारे में 95 % मुसलमानो को पता था. जिसमे से ८३ % वोट आप को किया.
वही आपको बता दे कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन की वजह से कालिंदी कुंज नोएडा मार्ग पूरी तरह से बंद है. इससे दिल्ली , नोएडा , फरीदाबाद जाने आने वाले करीब बीस लाख से ज्यादा लोग प्रभावित है। लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े है. उन्हें लाखो लोगो को हो रही मुसीबत के बजाय इस बात की चिंता है कि शाहीन बाग़ को फिर से गुलजार कैसे किया जाए।
आपको बता दे कि शाहीन बाग़ के आस पास कई शो रूम है जहां रोज करोड़ो का कारोबार होता है. ऐसे में कारोबारियों को अब तक कई करोड़ का नुकसान हो चूका है. कारोबारियों ने बताया है उन्हें काफी नुकसान हो रहे है लेकिन प्रदर्शन का विरोध नहीं कर सकते। अगर हम अपनी बात रखते है तो प्रदर्शनकारी हमे कौम का गद्दार कहने लगते है.
वही जामिया मिल्लिया और शाहीन बाग़ को जोड़ने वाले मार्ग पर डीटीसी की बस सेवा बंद हो गई है. धरने के दौरान सड़क बंद करने को लेकर स्थानीय आरडब्लूए और अन्य संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में सड़क खुलवाने को लेकर याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दिल्ली पुलिस और सरकार को नोटिस जारी किए है. वही आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप रास्ता नहीं रोक सकते। एक कॉमन क्षेत्र प्रदर्शन नहीं रखा जा सकता है। हर कोई ऐसे प्रदर्शन करने लगे तो क्या होगा? उन्होंने आगे कहा कि क्या आप पब्लिक रोड को ब्लॉक कर सकते है। क्या आप पब्लिक एरिया को इस तरह बंद कर सकते है. प्रदर्शन बहुत लम्बे समय से चल रहा है और प्रदर्शन को लेकर एक जगह सुनिश्चित होनी चाहिए। आपको बता दे की मामले की सुनवाई 17 फ़रवरी को होगा।
वही आपको बता दे कि शाहीन बाग़ प्रदर्शन की वजह से कालिंदी कुंज नोएडा मार्ग पूरी तरह से बंद है. इससे दिल्ली , नोएडा , फरीदाबाद जाने आने वाले करीब बीस लाख से ज्यादा लोग प्रभावित है। लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी जिद पर अड़े है. उन्हें लाखो लोगो को हो रही मुसीबत के बजाय इस बात की चिंता है कि शाहीन बाग़ को फिर से गुलजार कैसे किया जाए।
आपको बता दे कि शाहीन बाग़ के आस पास कई शो रूम है जहां रोज करोड़ो का कारोबार होता है. ऐसे में कारोबारियों को अब तक कई करोड़ का नुकसान हो चूका है. कारोबारियों ने बताया है उन्हें काफी नुकसान हो रहे है लेकिन प्रदर्शन का विरोध नहीं कर सकते। अगर हम अपनी बात रखते है तो प्रदर्शनकारी हमे कौम का गद्दार कहने लगते है.
वही जामिया मिल्लिया और शाहीन बाग़ को जोड़ने वाले मार्ग पर डीटीसी की बस सेवा बंद हो गई है. धरने के दौरान सड़क बंद करने को लेकर स्थानीय आरडब्लूए और अन्य संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में सड़क खुलवाने को लेकर याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दिल्ली पुलिस और सरकार को नोटिस जारी किए है. वही आपको बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आप रास्ता नहीं रोक सकते। एक कॉमन क्षेत्र प्रदर्शन नहीं रखा जा सकता है। हर कोई ऐसे प्रदर्शन करने लगे तो क्या होगा? उन्होंने आगे कहा कि क्या आप पब्लिक रोड को ब्लॉक कर सकते है। क्या आप पब्लिक एरिया को इस तरह बंद कर सकते है. प्रदर्शन बहुत लम्बे समय से चल रहा है और प्रदर्शन को लेकर एक जगह सुनिश्चित होनी चाहिए। आपको बता दे की मामले की सुनवाई 17 फ़रवरी को होगा।
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